27 मई 2026
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ आया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक 'मेगा प्लान' तैयार किया है, जिसमें जनवरी 2026 से शुरू होने वाली 17 बड़ी रैलियों की योजना शामिल है। यह कदम सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वर्चस्व को चुनौती देने के उद्देश्य से लिया गया है।
इस रणनीति का औपचारिक ऐलान इमरान मसूद, सांसद from Saharanpur के दिल्ली स्थित निवास पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बैठक में UP के सभी छह लोकसभा सांसदों और पार्टी दिग्गजों ने भाग लिया था।
रणनीतिक बैठक और भविष्य की रूपरेखा
18 दिसंबर को दिल्ली में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 2027 तक कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में एक मजबूत विपक्ष के रूप में स्थापित करना था। वहां तय हुआ कि पार्टी अपनी संगठनात्मक ताकत को जांचने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए व्यापक धन्यवाद यात्राएं निकालेगी।
यह कोई छोटी मुहिम नहीं है। प्लान के तहत, कांग्रेस उन 17 लोकसभा क्षेत्रों में रैलियां करेगी जहां उसने पिछले चुनावों में प्रतिस्पर्धा की थी। विशेष ध्यान उन छह सीटों पर दिया जाएगा जहां कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी: अमेठी, रायबरेली, सीतापुर, बाराबंकी, इलाहाबाद और सहारनपुर।
जनवरी से फरवरी तक का रोडमैप
इन रैलियों की शुरुआत 15 जनवरी 2026 के बाद की जाएगी। यह समयसीमा बहुत ही सटीक है, जो दिखाती है कि पार्टी ने इसका गहन अध्ययन किया है। अंतिम और सबसे बड़ी रैली फरवरी माह में राज्य की राजधानी लखनऊ में आयोजित होगी।
इस दौरान, कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य 'राजनीतिक जमीन का जायजा' लेना है। क्या ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समर्थन बढ़ा है? क्या कार्यकर्ता पंचायत चुनावों के लिए तैयार हैं? इन सवालों के जवाब मिलेंगे। रिपोर्ट्स बताती हैं कि पंचायत चुनावों को 'पूरे दमखम' से लड़ा जाएगा, जो राज्य की नींव को मजबूत करने की कुंजी माना जाता है।
लखनऊ में घेरಾವ और मनरेगा मुद्दा
केवल रैलियों तक सीमित नहीं, कांग्रेस ने लखनऊ में विधानसभा का घेराव भी किया। यह कदम मनरेगा मजदूरों के वेतन विलंब के मुद्दे पर उठाया गया था। सुबह से ही लखनऊ की सड़कों पर हलचल तेज हो गई थी, जैसे-जैसे हजारों कार्यकर्ता शहर की ओर बढ़ रहे थे।
अजय राय, राज्य अध्यक्ष of UP Congress Committee ने लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय से एक प्रेस ब्रीफिंग दी, जहां उन्होंने सरकार पर हमला बोला। यह घटना यह स्पष्ट करती है कि कांग्रेस अब केवल चुनावी राजनीति नहीं, बल्कि जनमुद्दों को लेकर भी सड़क पर उतर रही है।
गठबंधन की चर्चा और BSP समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों और टीवी डिबेट्स में एक बड़ा सवाल उठाया जा रहा है: क्या कांग्रेस बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साथ किसी समझौते की तैयारी में है? कई रिपोर्ट्स में 'BSP की गोद में छांव ढूंढने' जैसे शीर्षकों के साथ चर्चा हुई है। हालांकि, अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
इसके अलावा, 'अखिलेश यादव ने खेला दांव' जैसे शीर्षकों के साथ यह भी चर्चा हो रही है कि क्या कांग्रेस कुछ सीटों पर SP के पक्ष में पीछे हटेगी। ये बातचीत INDIA गठबंधन के भीतर की गतिशीलता को दर्शाती हैं, जहां सीट बांटने का खेल जारी है।
Frequently Asked Questions
कांग्रेस की 17 रैलियों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इन रैलियों का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति का जायजा लेना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना है। साथ ही, यह BJP के वर्चस्व को चुनौती देने और 2027 तक पार्टी को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
इन रैलियों की शुरुआत कब होगी?
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन धन्यवाद रैलियों की शुरुआत 15 जनवरी 2026 के बाद की जाएगी। अंतिम और सबसे बड़ी रैली फरवरी माह में लखनऊ में आयोजित होगी, जो लगभग डेढ़ से दो महीने की अवधि में फैली हुई है।
कौन सी लोकसभा सीटें इस योजना में शामिल हैं?
कांग्रेस उन 17 लोकसभा क्षेत्रों में रैलियां करेगी जहां उसने पिछले चुनावों में प्रतिस्पर्धा की थी। विशेष ध्यान अमेठी, रायबरेली, सीतापुर, बाराबंकी, इलाहाबाद और सहारनपुर जैसी उन छह सीटों पर होगा जहां पार्टी ने जीत दर्ज की थी।
लखनऊ में विधानसभा घेराव का कारण क्या था?
लखनऊ में विधानसभा का घेराव मनरेगा मजदूरों के वेतन विलंब और अन्य जनमुद्दों को लेकर किया गया था। यह कदम सरकार पर दबाव बनाने और 'सड़क से सदन तक' अपने विरोध को व्यक्त करने के लिए उठाया गया था।
क्या कांग्रेस BSP के साथ गठबंधन कर सकती है?
हालांकि अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और टीवी डिबेट्स में कांग्रेस और BSP के बीच संभावित समीकरणों पर चर्चा हो रही है। यह INDIA गठबंधन के भीतर की राजनीतिक गतिशीलता का हिस्सा है।